Jatasya Hi Dhruvo Mrtyur – Shreemad Bhagawat Geeta

जातस्त हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च । तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि ॥

सम्वत साेलह सै अडतीसे

सम्वत साेलह सै अडतीसे, अासाेज सुदि चाैदसकाे । जन्मदिन श्री देवचन्द्रजी, अाए प्रगटे मारवाड माें ।।

साल नव सै नब्बे मास नाै

साल नव सै नब्बे मास नाै, हुये रसूल काे जब । रुहअल्ला मिसल गाजियाे, सैयाँ उतरे तब ।।

छै दिन कुरान में

छै दिन कुरान में, वाके भएे जब । ता दिन की हकीकत, सारी छिप कही तब ।  

रास लीला खेलके

रास लीला खेलके, अाये बरारब में । तहाँ बात सब जाहिर करी, चला मागर इनसे ।।

रास ब्रज दाेऊ अखण्ड

रास ब्रज दाेऊ अखण्ड, कर चेतन बुद्धि फिरे मन । ए ब्रहमाण्ड तीसरा, जहाँ माेहम्मद अाये राेशन ।।

पहिले मूल अद्वैत में

पहिले मूल अद्वैत में,  भाेम जहाँ इश्क । तहाँ प्रेम रबद में, भया हुकम हक ।।

अब कहाें फेर के

अब कहाें फेर के, मूल मिलावे की वीतक । जैसी अाज्ञा धनी की, साे बातां बुजरक ।।