सम्वत साेलह सै अडतीसे

सम्वत साेलह सै अडतीसे, अासाेज सुदि चाैदसकाे ।

जन्मदिन श्री देवचन्द्रजी, अाए प्रगटे मारवाड माें ।।


साल नव सै नब्बे मास नाै

साल नव सै नब्बे मास नाै, हुये रसूल काे जब ।

रुहअल्ला मिसल गाजियाे, सैयाँ उतरे तब ।।


छै दिन कुरान में

छै दिन कुरान में, वाके भएे जब ।

ता दिन की हकीकत, सारी छिप कही तब ।

 


रास लीला खेलके

रास लीला खेलके, अाये बरारब में ।

तहाँ बात सब जाहिर करी, चला मागर इनसे ।।


रास ब्रज दाेऊ अखण्ड

रास ब्रज दाेऊ अखण्ड, कर चेतन बुद्धि फिरे मन ।

ए ब्रहमाण्ड तीसरा, जहाँ माेहम्मद अाये राेशन ।।


पहिले मूल अद्वैत में

पहिले मूल अद्वैत में,  भाेम जहाँ इश्क ।

तहाँ प्रेम रबद में, भया हुकम हक ।।


अब कहाें फेर के

अब कहाें फेर के, मूल मिलावे की वीतक ।

जैसी अाज्ञा धनी की, साे बातां बुजरक ।।


श्री महामति कहें एे साथजी

श्री महामति कहें एे साथजी, शास्त्र कहे याें कर ।

अागे अपनी वीतक, साे लिजाे चित्त धर ।।